ऑपरेशन

2016-05-24_Operation

इन्ह्माक उर्दू फ़ोरम पर मेरा सस्पेंस माइक्रो फिक्शन का हिंदी रूपांतरण शीर्षक “ऑपरेशन”

ऑपरेशन के पश्चात वह ऐसा लुप्त हुआ कि वह फिर कभी दिखाई नहीं दिया किन्तु आज अकस्मात नगर के माने हुए न्यूरो सर्जन लुक़मान की दृष्टि उस युवा के चेहरे पर पड़ी तो वह बेचैन हो कर अपनी कार से तुरंत बाहर आया तब तक वह बहुत देर से लगे जाम की भीड़ में खो गया, तो डॉक्टर भी उसकी खोज में भीड़ को चीरता हुआ आगे बढ़ने लगा अभी कुछ ही दूर आया था कि वह उसे फिर से दिखाई दे गया। तब उसके कक़रीब पहुँच कर डॉक्टर ने कहा, “ ओ मेरे भाई आप कहां खो गये थे आज बहुत मुश्किल से मिले हो आपका क़ीमती सामान मेरे पास रखा है , आख़िर मैं कब तक आपके दिमाग़ को संभाल कर रख सकूँगा।”
ये सुनते ही वह बोला, “ उसे आप ही रख लें अब उसकी ज़रूरत नहीं है।”

अभी डॉक्टर कुछ समझ पाता एक ज़ोरदार धमाके के साथ वह फट गया, सैकडों इंसानों के जिस्म के टुकड़े हवा और गर्द ग़ुबार के साथ उड़ रहे थे और डॉक्टर का भेजा सड़क पर पड़े विधुत के टूटे तारों में उलझा हुआ जल भुन रहा था ।

डॉक्टर लुक़मान आधी रात से खामोश बैठा अन्तरिक्ष में घूर रहा था।

लेखक- आले हसन खां, क़ायमगंज, भारत।